दो चिड़ियाँ

Siddhi Patel

Class 7B

दो चिड़ियाँ

सोने के पिंजरे में थी, एक सुन्दर चिड़िया प्यारी वन की चिड़िया फुदक रही है डाली-डाली सारी।

मिलन हुआ जब दोनों का यूँ आपस में बतियाई पूछा वन की पंछी ने तब तुम पिंजरे में कैसे हो आई।

पिंजरे की चिड़िया बोली आओ तुम भी भीतर बात करेंगे हम तुम दोनों आज ज़रा जी भरकर।

खाएँगे मिल अनार के दाने गटकेंगे मीठा पानी फिर झूल-झूल तुम झूले पर कहना अपनी कहानी।

वन की चिड़िया बोली उससे बंधन मुझे न भाए मैं स्वतंत्र निर्धन मुक्त हूँ अगाध मेघों के साये

पिंजरे की चिड़िया पिंजरे में वन की चिड़िया वन में समझे वही मोल मुक्ति का रहता जो बंधन में।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top