अच्छी बेटी बनूँगी मैं
जिसने उँगली पकड़कर चलना सिखाया
हमारी एक खुशी के लिए अपनी सारी खुशी ही भूल गए वो हैं मेरे पापा वह हैं मेरे पापा
दुख में रह कर हमें खुशी दिखाते हैं पापा
वो हैं मेरे पापा वह हैं मेरे पापा
जिसने उँगली पकड़कर चलना सिखाया
हमारी एक खुशी के लिए अपनी सारी खुशी ही भूल गए वो हैं मेरे पापा वह हैं मेरे पापा
दुख में रह कर हमें खुशी दिखाते हैं पापा
वो हैं मेरे पापा वह हैं मेरे पापा
लाएँगे हम नया सवेरा
सपना होगा अपना पूरा
स्वच्छता का होगा बसेरा
खुशियों का अब होगा डेरा
धरती होगी तो खुशहाल
प्यार और खुशियों से भरा है यह
आओ इसे करें नमन
प्रकृति की सुरम्य हरियाली से
खूबसूरत हुआ मेरा वतन।
प्रेम और करुणा की
चल-चल-चल कुछ कर गुज़र,
हिम्मत रख मुस्कुरा आँखों में एक
जूनून रख, रुकना नहीं थकना
नहीं ‘तितलियों’ सा उड़ गुज़र तू
कुछ कर गुज़र, एक बार होगी
Friends like brothers, hearts that sync
Stand together quicker than you think.
Laugh in chaos, rise when we drop —
No doubt about it — bhai-chara on top.
In every storm, we never stop.
जहाँ लड़े थे हज़ारों सैनिक
लाखों स्वतंत्रता सेनानी
न जाने कितने शहीद हुए
न जाने कितनों ने दी थी कुर्बानी
1857 की क्रांति में लाखों सैनिक
जो संस्कृति थी पहले उसको
वापस लाते हैं। युवाओं चलो जागो और
जगाते हैं जैसा चाहते थे, हमारे स्वतंत्रता
संग्रामी वैसा प्यारा भारत देश बनाते हैं।
युवाओं चलो कुछ कर दिखलाते हैं।
हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा,
सदा यही समझाती है।
भारत के कण-कण में,
हिंदी ही बोली जाती है।
हिंदी हमारी मातृभाषा,
राह में चलते-चलते गिर जाना बुरा नहीं है,
लेकिन वापस उठने का प्रयास ही न करें वह
राहगीर क्या?
संघर्ष करते-करते थक जाना बुरा नहीं है,
लेकिन थक जाने के डर से संघर्ष ही न हो