कविता मेरी मित्र
कविता मेरी मित्र हमेशा मेरे साथ रहती, दुःख-सुख में भी साथ रहती। हमेशा मेरा हौशला बढ़ाती, वो मेरी मित्र है। एक पल झगड़ा करती, एक पल फिर मिल जाती- जाती। हँसा-हँसा के मुझे थकाती, वो मेरी मित्र है। वो एक योग्य इंसान है, जो बहुत ही..
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कविता मेरी मित्र हमेशा मेरे साथ रहती, दुःख-सुख में भी साथ रहती। हमेशा मेरा हौशला बढ़ाती, वो मेरी मित्र है। एक पल झगड़ा करती, एक पल फिर मिल जाती- जाती। हँसा-हँसा के मुझे थकाती, वो मेरी मित्र है। वो एक योग्य इंसान है, जो बहुत ही..