मेरी माँ

Logakshi sahu

Class 7A

मेरी माँ

मम्मी तूने ही मुझे जन्म दिया,
फिर छोटे से बड़ा किया।

मेरी हर मंज़िल तूने ही मुझे दिखाया,
हर छोटी-बड़ी चीज़ों का फर्क तूने ही मुझे समझाया।

जब भी तुम मुझे डाँट लगाती,
उसमें भी तेरा प्यार छुपा होता,
तेरी परवाह छुपी होती।

पढ़ाई में हमेशा तूने मेरी मदद की,
हर छोटी-बड़ी गलतियों को सुधारना मुझे सिखाया।

हर छोटी-बड़ी चीज़ों में रुचि मेरी दिखाती,
हर मुश्किलों का सामना करना बचपन से सिखाती आई।

मेरे हर अच्छे कर्मों में खुश भी बहुत होती,
और अगर कुछ गलत हो जाए तो डाँट भी लगाती।

जब भी मुझसे गुस्सा होती,
तो डाँट भी लगाती,
लेकिन फिर थोड़ा देर भी नहीं करती,
मनाने चली आती।

माँ कहूँ या भगवान, समझ नहीं आता।

माँ, तेरे हर सपनों को पूरा करना मेरी इच्छा बन चुकी है,
तेरे नक्शे कदमों पर चलकर मेरी पहचान बन चुकी है।

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