परीक्षाओं के प्रति बच्चों का डर

Muskan Tariya

Class 8A

परीक्षाओं के प्रति बच्चों का डर

परीक्षा जिसका नाम सुनते ही
आधे विद्यार्थियों की शक्ल देखने लायक होती है।

परीक्षाओं से सभी अंदर तो
थोड़ा डरे हुए होते ही हैं।

इस बात पर नहीं कि
उन्होंने कोई टॉपिक छोड़ दिया है,
उन्हें इस बात की ज्यादा चिंता रहती है
कि वे पास तो हो जाएँगे ना।

आधा पेपर इसी की वजह से
खराब बन जाता है।

हमें परीक्षाओं से डरना नहीं चाहिए।
यह आती रहेंगी, जाती रहेंगी।
लेकिन इसका अर्थ नहीं है
कि हम पढ़ाई करना छोड़ दें।

परीक्षाएँ हमारी योग्यताएँ
या कितना ज्ञान है
यह सिद्ध नहीं करतीं।

वह हमें यह बताती हैं
कि विद्यार्थी पढ़ाई के प्रति
कितना समर्पित है,
अपने पढ़ाई के प्रति
कितना ईमानदार है।

परीक्षाओं में फेल होने का
यह अर्थ नहीं होता है
कि वह जिंदगी में
फेल हो जाएँगे।

कभी-कभी परीक्षाओं में
फेल होने से
हम नए तरीके से,
नए जोश के साथ पढ़ते हैं
या पढ़ना चालू करते हैं।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top