Chiranjeev Bhoi
Class 8 A
प्रकृति से सवाल
एक दिन मैंने प्रकृति से पूछा
कहाँ है उसकी चहकती दुनिया
कहाँ है उसके खुले आसमान
वह पेड़ों की ठंडी छाया
वह नदियों की खूबसूरत माया
अरण्यों की वह सुंदर आहट में बसते थे हरे-भरे वन
जिन्हें देखते ही पवित्र हो उठता उस सुनहरी प्रकृति का मन
क्यों उन पर्वतों की वादियाँ हो गई सूनी इस तरह
जाने क्यों गुम हो गई तुम इस ज़माने और शहर से
इस पर प्रकृति ने दिया जवाब
तुम मनुष्य ही कर रहे हो मेरा विनाश
तोड़ा है तुमने मेरा विश्वास
की है तुम्हीं ने पेड़ों की कटाई
अस्वच्छता भी तुम्हीं ने फैलाई
मानव ने अपने कुकृत्यों से मुझे आधा ही मार डाला
करके प्रदूषण उसने मुझ पे मेरी दुनिया को ही उजाड़ डाला